नयी दिल्ली (वार्ता) :
उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पंचायत चुनाव कराने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई की ओर से दायर याचिका में हस्तक्षेप से आज इन्कार कर दिया। न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल और न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि वह इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगी। शीर्ष अदालत ने, हालांकि याचिकाकर्ता को अपनी शिकायत लेकर राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष जाने की अनुमति दे दी। Also Read - राहुल के 'मिथ्याग्रह' का राजघाट पर हुआ पर्दाफाश : भाजपा न्यायालय ने गत शुक्रवार को सभी संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था और आदेश के लिए आज की तारीख मुकर्रर की थी। पिछली सुनवाई के दौरान प्रदेश भाजपा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी थी कि तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता पंचायत चुनाव के लिए भाजपा उम्मीदवारों को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोक रहे हैं। कार्यकर्ताओं को धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने दलील दी थी कि ऐसा लगता है कि सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ता भाजपा कार्यकर्ताओं को नामांकन पत्र दाखिल करने से रोकने के लिए सुनियोजित हिंसा का माहौल बना रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इन दलीलों का पुरजोर विरोध किया था। पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिले का आज अंतिम दिन है। याचिकाकर्ता ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की तैनाती और ऑनलाइन नामांकन की सुविधा उपलब्ध कराने के दिशानिर्देश देने की मांग भी की थी।
पंचायत चुनाव: प. बंगाल में भाजपा को सुप्रीम कोर्ट से झटका
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